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‘प्रदर्शन के अलावा पब्लिसिटी भी जरुरी…’, ऋतुराज-रिंकू के चयन पर बद्रीनाथ का सनसनीखेज बयान

नई दिल्ली: क्या क्रिकेट में केवल प्रदर्शन ही मायने रखता है? यह सवाल पूर्व भारतीय बल्लेबाज सुब्रमण्यम बद्रीनाथ ने उठाया है। ऋतुराज गायकवाड़ और रिंकू सिंह जैसे युवा खिलाड़ियों को श्रीलंका दौरे के लिए भारतीय टीम में शामिल नहीं किए जाने पर बद्रीनाथ ने हैरानी जताई है।

उन्होंने कहा है कि इन खिलाड़ियों को शायद प्रदर्शन के अलावा कुछ और भी करने की जरूरत है, जैसे कि टैटू बनवाना या बॉलीवुड एक्ट्रेस के साथ अफेयर में रहना। बद्रीनाथ का यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और इसकी जमकर आलोचना हो रही है।

लेकिन क्या बद्रीनाथ की बातों में कुछ सच्चाई है?
क्या क्रिकेट में सफलता के लिए सिर्फ प्रतिभा और मेहनत ही काफी नहीं है?
क्या खिलाड़ियों को अपनी इमेज बनाने के लिए भी कुछ करना पड़ता है?

बद्रीनाथ का बयान

बद्रीनाथ ने एक तमिल टीवी चैनल पर बातचीत करते हुए कहा, “जब ऋतुराज गायकवाड़, रिंकू सिंह और उनके जैसे अन्य खिलाड़ियों को भारतीय टीम के लिए नहीं चुना जाता है, तो कभी-कभी ऐसा लगता है कि आपको एक ‘बुरे आदमी’ की छवि की जरूरत है। ऐसा लगता है कि आपको किसी बॉलीवुड एक्ट्रेस के साथ रिलेशनशिप में होने की जरूरत है, एक अच्छा मीडिया मैनेजर होना चाहिए और आपके शरीर पर टैटू होना चाहिए।”

बद्रीनाथ का यह बयान निश्चित रूप से विवादास्पद है।
लेकिन क्या यह सच है, क्या क्रिकेट में सफलता के लिए सिर्फ प्रतिभा और मेहनत ही काफी नहीं है? इसका जवाब है – नहीं।

निश्चित रूप से, टेलेंट और मेहनत सफलता के लिए सबसे जरुरी हैं।
लेकिन आज के दौर में, इमेज भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई है। सोशल मीडिया के युग में, खिलाड़ियों को अपनी छवि बनाने के लिए काफी कुछ करना पड़ता है।

उन्हें अपने फैंस से जुड़ने और एक ब्रांड बनाने के लिए सोशल मीडिया का उपयोग करना होता है। उन्हें स्टाइलिश दिखना होता है और फैशनेबल कपड़े पहनने होते हैं और हां, कुछ मामलों में, टैटू और बॉलीवुड एक्ट्रेस के साथ अफेयर भी मदद कर सकते हैं।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि क्रिकेट में केवल इमेज ही मायने रखती है आखिर में, यह परफॉर्मेंस ही है जो सबसे ज्यादा मायने रखता है। ऋतुराज गायकवाड़ और रिंकू सिंह दोनों ही प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं। उन्होंने घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन किया है। लेकिन उन्हें अभी भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को साबित करना बाकी है। यदि वे लगातार अच्छा प्रदर्शन करते रहते हैं, तो उन्हें निश्चित रूप से भारतीय टीम में जगह मिलेगी। लेकिन अगर वे खराब प्रदर्शन करते हैं, तो इमेज बनाने से उन्हें कोई फायदा नहीं होगा।

सुब्रमण्यम बद्रीनाथ का बयान निश्चित रूप से अतिवादी है। लेकिन इसमें कुछ सच्चाई भी है। आज के दौर में, क्रिकेट में सफलता के लिए सिर्फ टैलेंट और मेहनत ही काफी नहीं है।

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